03 अगस्त, 2009

हँसते-मुस्कुराते

डाकू (ताऊ से)- सुन या तो तू अपनी जान देगा, या फिर वह सारा रुपया जो पोटली में दबाकर ले जा रहा है।

ताऊ (डाकू से)- नहीं जी, तुम मेरी जान ही ले लो, रुपया तो मैंने बुढ़ापे के लिए रख छोड़ा है।


ताऊ (भाटिया जी से)- मैं बचपन में बहुत ताकतवर था..

भाटिया जी (ताऊ से)- वो कैसे?

ताऊ - मां कहती है मैं जब रोता था तो सारा घर सिर पर उठा लेता था।


गरीब मरीज- डॉक्टर साहब मेरे पास पैसे नही हैं आप मेरा इलाज कर दें तो कभी आपके काम आऊंगा।

डॉक्टर- तुम काम क्या करते हो?

मरीज- जी कब्र खोदता हूं।


मैं (रामप्यारी से)- तुम बल्ब पर ताऊ का नाम क्यों लिख रहे हो?

रामप्यारी (मुझसे से)- मैं ताऊ का नाम रोशन करना चाहती हूं।


रामप्यारी बहुत देर से घर के बाहर खड़ी दरवाजे की घंटी बजाने की कोशिश कर रही थी तभी ज्ञान जी आये और बोले - क्या कर रही हो रामप्यारी ?

रामप्यारी - अंकल, ये घंटी बजाना चाहती हूं।

ज्ञान जी (घंटी बजाकर)- ये तो बज गयी अब क्या है।

रामप्यारी - अब भागो!


मैं (बॉस से)- सर मेरा वेतन बढ़ा दीजिये, अब मेरी शादी होने वाली है।

बॉस- कार्यालय के बाहर होने वाली दुर्घटनाओं के लिए ऑफिस जिम्मेदार नही है।

लेडी डॉक्टर (गुस्से से)- तुम रोज सुबह अस्पताल के बाहर खड़े होकर औरतों को क्यों घूरते हो?

मैं (डॉक्टर से)- मैडम, अस्पताल के बाहर ही तो लिखा है- औरतों को देखने का समय सुबह 9 बजे से 11 बजे तक।



पत्नी (सुरेन्द्र जी से )- रात को आप शराब पीकर गटर में गिर गए थे।

सुरेन्द्र जी (पत्नी से)- क्या बताऊं, सब गलत संगत का असर है, हम 4 दोस्त....1 बोतल, और वो तीनों कम्बख्त पीते नही।


12 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा हा वाह वाह बहुत खूब बधाई

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  2. बहुत दिनों बाद आये .छुटकुले मजेदार हैं.

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  3. वाह आलोक जी लाजवाब. आनंद आया.

    रामराम.

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  4. वाह आलोक जी लाजवाब. आनंद आया.

    रामराम.

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  5. हा हा हा हा ......मजा आ गया ........

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  6. बेहतरीन चुट्कुले....सारे के सारे मजेदार.....हा हा हा हा हा!!!

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  7. बढिया जोंक = पकडे़ तो छोडे़ नहीं :)

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