09 September, 2009

छुटपुट चुटकुले

राज जी (ताऊ से)- शादी में दूल्हे के साथ बाराती क्यों जाते हैं?
ताऊ - क्योंकि बड़े कहते हैं कि किसी की खुशी में जाओ या न जाओ पर मुसीबत में जरूर जाना चाहिए।


ताऊ (डॉक्टर से)- मुझे अजीब सी बीमारी हो गयी है.. जब मेरी बीवी (ताई ) बोलती है तो मुझे कुछ सुनाई नही देता..
डॉक्टर- ये बीमारी नही खुदा की नियामत है


ज्ञान जी ने आने वाले से पूछा, " क्या तुम्हें पता नही कि आज्ञा के बिना अन्दर आना मना है।"
आने वाला, "जनाब मैं आज्ञा लेने के लिए ही अन्दर आया हूं।"


यात्री (मुझसे )- तुमने मेरी जेब में हाथ क्यों डाला?
मैं - मुझे माचिस चाहिए थी। यात्री- तुम मुझसे मांग सकते थे।
मैं - मैं अजनबियों से बात नही करता


सुरेन्द्र जी को उनके दोस्त ने खाने पर बुलाया।
सुरेन्द्र जी जब दोस्त के घर गए तो घर पर ताला लगा था, और लिखा था मैंने तुमको बेवकूफ बनाया।
सुरेन्द्र जी ने होशियारी दिखायी और नीचे लिख दिया, मैं तो आया ही नही था।


सुरेन्द्र जी की पत्नी (सुरेन्द्र जी से)- तुम्हें मेरी कौन सी बात सबसे अच्छी लगती है, मेरी खूबसूरती या मेरी समझदारी।
सुरेन्द्र जी - मुझे तुम्हारी ये मजाक करने की आदत बहुत अच्छी लगती है


अध्यापिका - रामप्यारी ! तुम्हारा सारा होमवर्क गलत है।
आखिर इसका क्या कारण है??
रामप्यारी - जी, कारण तो ताऊ ही बता सकते है


अध्यापक ने रामप्यारी से कहा, मैने कल तुम्हें जो हिंन्दी मे पाठ पढाया था, उसे सुनाओ ।
रामप्यारी - टीचर जी , आता नही है। इस पर अध्यापक ने कहा, नही आता तो ऐसा करो जो आता है वही सुनाओ।
रामप्यारी बोली - मुझे तो गाना आता है वही सुना दूँ ?

(साभार जागरण)

02 September, 2009

जिंदगी एक उड़ान है


जिंदगी एक उड़ान है
सुख और दुःख इसमे एक समान है
लगता है देखकर दूसरों को उड़ना आसान है
पर आती है कितनी मुश्किलें हम तो अन्जान है
जिंदगी की इस दौड़ में हर कोई मेहमान है
पुरे कर लिए अपने सपने जिसने , वो ही महान है
कुछ ऐसे लोग भी है जो जिन्दगी से परेशान है
हार कभी न मानना, ये तो जिन्दगी का इम्तहान है
जिन्दगी दिखा रही है हर रोज खेल नए , हमें इसका गुमान है
कभी कुछ खो के , कभी कुछ पा के हम हैरान है
जो हार गया समय से पहले , तो ये जिन्दगी का अपमान है
मिली है बड़ी मुश्किलों से ये जिन्दगी , ये ऊपर वाले का अहसान है
गिर कर फिर सभलना ही जिन्दगी की पहचान है
जो दुसरो के लिए कुछ कर जाए , तो ये जिन्दगी की शान है
जिंदगी एक लम्बी उड़ान है
सुख और दुःख इसमे एक समान है

03 August, 2009

हँसते-मुस्कुराते

डाकू (ताऊ से)- सुन या तो तू अपनी जान देगा, या फिर वह सारा रुपया जो पोटली में दबाकर ले जा रहा है।

ताऊ (डाकू से)- नहीं जी, तुम मेरी जान ही ले लो, रुपया तो मैंने बुढ़ापे के लिए रख छोड़ा है।


ताऊ (भाटिया जी से)- मैं बचपन में बहुत ताकतवर था..

भाटिया जी (ताऊ से)- वो कैसे?

ताऊ - मां कहती है मैं जब रोता था तो सारा घर सिर पर उठा लेता था।


गरीब मरीज- डॉक्टर साहब मेरे पास पैसे नही हैं आप मेरा इलाज कर दें तो कभी आपके काम आऊंगा।

डॉक्टर- तुम काम क्या करते हो?

मरीज- जी कब्र खोदता हूं।


मैं (रामप्यारी से)- तुम बल्ब पर ताऊ का नाम क्यों लिख रहे हो?

रामप्यारी (मुझसे से)- मैं ताऊ का नाम रोशन करना चाहती हूं।


रामप्यारी बहुत देर से घर के बाहर खड़ी दरवाजे की घंटी बजाने की कोशिश कर रही थी तभी ज्ञान जी आये और बोले - क्या कर रही हो रामप्यारी ?

रामप्यारी - अंकल, ये घंटी बजाना चाहती हूं।

ज्ञान जी (घंटी बजाकर)- ये तो बज गयी अब क्या है।

रामप्यारी - अब भागो!


मैं (बॉस से)- सर मेरा वेतन बढ़ा दीजिये, अब मेरी शादी होने वाली है।

बॉस- कार्यालय के बाहर होने वाली दुर्घटनाओं के लिए ऑफिस जिम्मेदार नही है।

लेडी डॉक्टर (गुस्से से)- तुम रोज सुबह अस्पताल के बाहर खड़े होकर औरतों को क्यों घूरते हो?

मैं (डॉक्टर से)- मैडम, अस्पताल के बाहर ही तो लिखा है- औरतों को देखने का समय सुबह 9 बजे से 11 बजे तक।



पत्नी (सुरेन्द्र जी से )- रात को आप शराब पीकर गटर में गिर गए थे।

सुरेन्द्र जी (पत्नी से)- क्या बताऊं, सब गलत संगत का असर है, हम 4 दोस्त....1 बोतल, और वो तीनों कम्बख्त पीते नही।


27 July, 2009

चुनाव परिणाम

ग्राम प्रधान चुनाव के नतीजे आ गए थे , सुरेन्द्र जी बड़े परेशान से घर के आगे चारपाई डाल कर बैठे हुए थे . तभी उनके खेतों में काम करने वाला छोटे लाल आ और बोला "का बात है साहब बड़ा परेशान लागत हो ? ".

सुरेन्द्र जी बोले "चुनाव का नतीजा आ गया है बस उसे जान कर बड़ा दुखी हूँ "

छोटे लाल बोला "का भवा साहब, हम और हमरे घरवाली तो आपके ही वोट दिए रहे , लेकिन सुने हैं की जगदीश जीत गए हैं "

इतना सुनते ही सुरेन्द्र जी के चहरे का रंग बदल गया और वो बोले "का छोटेलाल, तू सही कह रहे हो की तू हमको वोट दिए हो "

छोटेलाल बोला "हाँ मालिक , हम और हमरे घरवाली आपही को वोट दिए हैं "

सुरेन्द्र जी ने दुबारा पूछा "सच कह रहे हो छोटेलाल या झूठ बोल रहे हो "

"नहीं सरकार हम सच बोल रहे हैं" छोटेलाल बोला .

सुरेन्द्र जी ने पास के पड़ा हुआ डंडा उठाया और लगे मारने छोटेलाल को तब तक और लोग आ गए और बोले "अरे सुरेन्द्र बाबु हार गए तो गरीब को मारोगे क्या "

सुरेन्द्र जी बोले "नहीं हम इसको इसलिए मार रहे हैं क्योंकि ये हमसे झूठ बोल रहा हैं "

लोगोने पूछा "अरे क्या झूठ बोल दिया इसने "

अभी थोडी देर पहले मतगणना केंद्र से आया और यहाँ बैठ कर सोच रहा था "मुझे केवल एक वोट मिला है, तो मेरे बीवी और बच्चोंने किसे वोट दिया है. तभी ये आ गया और बोलने लगा की "इसने और इसकी घरवाली ने मुझे वोट दिया हैं, बस इसी बात पर गुस्सा आ गया " .

20 April, 2009

गजबे हो जायेगा

एक जजमान कथा सुन रहे थे . पंडित जी ने कथा शुरू होने के पहले ही जजमान को बता दिया था कि कथा के बीच में उठना मना है . जब पंडित जी को कथा बाचते बहुत समय हो गया तो जजमान ने पंडित जी से पूछा "महाराज अगर कथा के बीच में उठना चाहूँ तो क्या उठ सकता हूँ ? ".

पंडित जी बोले "नहीं , जजमान आप कथा के बीच से उठ कर कहीं नहीं जा सकते ".

जजमान बोले "पंडित जी , अगर कोई आवश्यक कार्य हो तो ?".

पंडित जी बोले "नहीं , जजमान अगर ऐसा करेगे तो कथा फलित नहीं होगी ".

जजमान बोले "पंडित जी , अगर लघुशंका जाना हो तो ?".

पंडित जी बोले "तो जजमान आप धीरे से उठ कर चले जाइये और हाथ-पैर धोके, थोड़ासा जल ऊपर छिड़क कर, वापस आके बैठ जाइये "।

जजमान बोले "महराज, अगर दीर्घ शंका जाना हो तो ? "

पंडित जी बोले "जजमान , तबतो गजबे हो जायेगा ".

जजमान बोले "महराज , गजबे करके तो बैठे हुए है , अब बताइए क्या करे ?"

18 April, 2009

बाप बाप है

बेटा कितना भी बड़ा क्यों न हो जाये बाप से दो कदम पीछे ही रहता है । किसी ने मुझसे कहा की यदि ऐसा है तो जीतनी खोज आज तक हुई है वो खोजे उनके बाप ने क्यों नहीं की , नई दुनिया की खोज तो कोलम्बस के बाप को कर लेनी चाहिए थी, कोलम्बस ने क्यों की ? मैंने कहा "मैं उस बारे में नहीं कह रहा हूँ , मेरा अर्थ कुछ दूसरा है "। मैं आपको एक घटना सुनाता हूँ ।

एक लड़का अजय घर से दूर रह कर इंजीनियरिंग की पढाई करता था । उसने अपने सभी दोस्तों से बता दिया था की उसके पिता जी बहुत खतरनाक है , बहुत मारते है , अगर वो कभी आयें तो तुम लोग उनसे दूर ही रहना । एक दिन दोपहर में अजय के कमरे पर कई लड़के बैठ कर गप्पे मार रहे थे , तभी दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी । अजय ने दरवाजा खोला तो देखा सामने उसके पिता जी खड़े है । वो अन्दर आये तो अजय ने दोस्तों से इशारे में कहा की वो लोग बाहर चले जाये पर किसी ने गौर नहीं किया । अजय के पिता जी ने अन्दर आ के सबसे नाम पूछा और हाथ मिलाया और अजय को पैसे देते हुए बोले "अजय , मैं कुछ ले के आ नहीं पाया , पास में कोई दुकान हो तो सबके खाने के लिए कुछ मिठाई -समोसे ले आयो , तब तक मैं तुम्हारे दोस्तों से बात करता हूँ "। अजय ने अपने दोस्तों से फिर इशारे से जाने के लिए कहा पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, एक दोस्त ने देख लिया तो वो अजय से बोला " मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ "।

अजय अपने दोस्त के साथ सामान लेने चला गया तो अजय के पिता जी ने अपने जेब से एक सिगरेट का पैकेट निकला और इधर -उधर जेब में हाथ डाल माचिस खोजने लगे । एक लड़के ने पूछा "अंकल माचिस खोज रहे है, वो अलमारी पर रखी है" । अजय के पिता जी ने सिगरेट सुलगाली और पीते हुए बाते करने लगे फिर अचानक उन्होंने अजय के दोस्तों से पूछा क्या तुम सिगरेट पीते हो तो सबने मना कर दिया, पर जब सिगरेट के धुएं से एक-दो दोस्तों को तलब लगने लगी, तो बोले अच्छा अंकल जी हम चलते है । तब अजय के पिता जी बोले "अरे यार बाहर जा के सिगरेट पियोगे ना ,यहीं पिलो "अजय भी तो पीता मैं जानता हूँ, हमने तो १०वीं से ही सिगरेट पीना शुरू कर दिया था ". अंकल की बात सुन कर, अजय के दो दोस्तों ने अंकल से सिगरेट लेकर सुलगाली और फिर तो बातों का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ की लड़के भूल गए की वो एक दोस्त के बाप से बात कर रहे हैं ।

हर तरह की बाते उन्होंने अंकल जी से कर डाली और अजय के पिता जी भी बड़े मजे के साथ उनसे बात कर रहे थे । अजय के दोस्तों और पिता जी का शाम को बाहर खाने-पीने का भी प्रोग्राम बन गया । सबने अपने और अजय के बारे में भी सारी बाते अजय के पिता जी को बता दी , की किसकी कितनी गर्लफ्रेंड है ,कौन कितनी सिगरेट और शराब पीता है , कौन कालेज छुट्टी कर फिल्म देखने जाता है, आदि-आदि

जब अजय वापस आया तो कमरे के बाहर आती आवाज से उसे पता चल गया की, आज तो मैं गया , अन्दर सारे मौजूद है , उन्हने पता नहीं क्या-क्या पापा से बताया होगा । दरवाजा खटखटाया तो , उसके पापा ने दरवाजा खोला । अजय ने अन्दर देखा कमरे में सिगरेट का धुवाँ भरा हुआ है और उसका एक दोस्त आराम से सिगरेट पीते हुए बात कर रहा है। अजय के पिता जी ने सबको मिठाई दी और कहा की अब वो थोडा आराम करना चाहते है, तो शाम को मिलेगे । अजय के दोस्त अजय से ये कहते हुए गये की "तुम्हारे पापा कितने अच्छे है "। दोस्तों के जाने के बाद अजय के पिता जी ने बेल्ट निकाली और अजय को दम भर के मारा और बोले अगर अगली बार आया और पता चला की तुम ये सब करते हो तो पढाई छुडा के घर बैठा दूंगा ।

पिता जी के जाने के बाद अजय अपने दोस्तों के पास गया और बोला की "मैंने तुम्हे बताया था की , मेरे पापा बहुत खतरनाक है फिर भी तुम लोग उनके सामने सिगरेट पी रहे थे और उन्हें मेरे बारे मने सब कुछ बता दिया "। दोस्त बोले "सिगरेट तो तुम्हारे पापा ने ही हमें ऑफर की थी और वो कह रहे थे की उन्हें सब पता है तुम्हारे बारे में " । अजय बोला "मेरे पापा ना सिगरेट पीते है और ना शराब , वो तो तुम लोगों से सब पता करने के लिए ऐसा किया और तुम बेवकूफ लोग उनके जाल में आ गये और सब कुछ बक दिया" ।

बाप बाप है , बेटा बेटा ही है !
(कहानी सत्य घटना पर आधारित है )