03 अप्रैल, 2009

बस भर गई

एक जजमान ने सत्यनारायण कथा कराई, उसके बाद पंडित जी को भोजन ग्रहण करने के लिए कहा . पंडित जी ने खाना शुरू किया और देखते- देखते जब रसोई में खाना लगभग आधा हो गया तो जजमान को चिंता हुई की लगता है आज भूखे ही रहना पड़ेगा, तो वो पंडित जी से बोले "पंडित जी भोजन के बीच में जल भी ग्रहण करे".

पंडित जी बोले "जजमान, बीच तो आने दे ". जब रसोई में सारा खाना खत्म हो गया तो पंडित जी बोले "वाह जजमान मज़ा आ गया , बहुत ही स्वादिष्ट भोजन था , आज बस (पेट) भर गयी".

जजमान बोले "अरे पंडित जी , अभी रसगुल्ला तो आप ने खाया ही नहीं ". पंडित जी बोले "अच्छा रसगुल्ला, ले आइये ". पंडित जी ने १०-१५ रसगुल्ले खा लिए, तो जजमान बोले "पंडित जी आप तो कह रहे थे की बस भर गयी, तो ये रसगुल्ला कैसे खा गए ".

पंडित जी बोले "जजमान , कंडेक्टर (परिचालक ) वाली सीट खाली थी".
जजमान बोले" महराज , रसमलाई भी है " . पंडित जी बोले "अरे पहले काहे नहीं बताये , अच्छा ले आइये ".

पंडित जी १०-१२ रसमलाई भी खा गए तो जजमान बोले "महराज , बस भर गयी थी , कंडेक्टर वाली सीट भी भर गयी थी , तो ये रसमलाई कहाँ गयी ?"


पंडित जी बोले "जजमान , चालक (ड्राईवर ) वाली जगह तो खाली बची थी ना ".

जजमान बोले "महराज अभी लड्डू भी रह गए है ".
पंडित जी बोले "जजमान, ठीक है वो भी ले आइये ".
जजमान बोले "पंडित जी अब तो बस में सारी जगह भर गयी है , ड्राईवर - कंडेक्टर वाली जगह भी भर गयी है, अब कहाँ जगह बची है " .


पंडित जी बोले "जजमान , बांध के दे दीजिये , बस के ऊपर सामान वाली जगह तो अभी खाली ही है ".

18 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा हा , आलोक भाई मजा आ गया । पंडित जी क्या कमाल के थे । बस भर गयी फिर भी खाये जा रहे हैं । आपको पूरे १०० नंबर दिये हमने ।

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  2. आपने बहुत सहीं बात बताया / पड़कर बहुत खुशी हुई / मे ये जानलेना चाहता हू कि, कौनसी टूल उसे करके आपने हिन्दी टाइप करते हे ? रीसेंट्ली मे यूज़र फ्रेंड्ली टाइपिंग टूल केलिए सर्च कर रहा ता, तो मूज़े मिला " क्विलपॅड ". ये तो 9 भाषा मे उपलाबद हे और इस मे तो रिच टेक्स्ट एडिटर भी हे / आप इसिक इस्तीमाल करते हे क्या...?

    सुना हे की " क्विलपॅड " गूगले से भी अच्छी टूल हे..? गूगल इंडिक मे तो 5 भाषा उपलब्ड़ा हे और उसमे तो रिच टेक्स्ट एडिटर भी नही / ये दोनो मे कौंसिवाली यूज़र फ्रेंड्ली हे...?

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  3. ऐसे ही पण्डितों का प्रताप है कि भारत की बस चल रही है! :-)

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  4. मजा आ गया. हमारे नेताओं की भी तो यही तस्वीर बनती है.

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  5. श्री ज्ञानदत्त पाण्डेय जी से मैं भी सहमत हूँ अलोक जी .

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  6. वाह आलोक भाई....क्या बात है, मजेदार......उप्पर की सीट खाली है, जोरदार है

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  7. भई आलोक जी,बस में थोडी सी जगह तो अभी भी बाकी है,एक दो सवारी तो बाहर लटककर भी जा ही सकती है......

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  8. अरे इन पण्डितों में सब्र नाम की चीज होती ही कहाँ है ?

    लगता है ऊपर पण्डितों की संख्या ज्यादा है , मैं कुछ गलत बोल गया :)

    अब बोल ही दिया है तो देख लेना पार्टनर !

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  9. बाप रे... यह पंडिता था कि ट्रेकटर की ट्राली, मजा आ गया अलोक जी.
    धन्यवाद

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  10. यार भूखे पेट सोचा भी मत करो :)


    वैसे इतना रोचक सोचते हो तो


    ठीक है भूखे पेट भी सोचा करो :)

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  11. आलोक , ये पंडतजी कहा से पकड़ कर लाये हो.
    बहुत खूब रही ये बस वाली ........

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