18 फ़रवरी, 2009

होत न आज्ञा

आज सुबह जब मैं हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा था तो मेरे एक मित्र ने कहा आप को पता है की हनुमान चालीसा में लिखा हुआ है कि "बिना पैसे के कोई आज्ञा / आदेश नही होता "। मैंने कहा नही मैंने आज तक नही पढ़ा, तो वो बोले "आप ने कभी ध्यान से नही पढ़ा" ।

मैंने कहा "मैं रोज हनुमान चालीसा का पाठ करता हूँ और मुझे कंटस्थ है "।

वो बोले नही आप ने बस पढ़ा है लेकिन कभी अर्थ पर ध्यान नही दिया ।


मैंने कहा "मुझे हर पंक्ति याद है और किसी भी पंक्ति में ऐसा कुछ नही है "।


वो बोले "आप ने एक पंक्ति पर ध्यान नही दिया "। मैंने कहा "कौन सी पंक्ति "।


"होत न आज्ञा बिनु पैसारे" एकदम सरल अर्थ है "बिना पैसे के कोई आज्ञा नही होती, अगर आप के पास पैसा नही है तो कोई भी आप कि बात नही सुनेगा"।


काफी सोचने के बाद मैंने कहा "कह तो आप सही रहे है लेकिन हम मानेगे नही " तो वो बोले "ठीक है आप मनो या न मनो आप के मानने या न मानाने से अर्थ बदल थोड़े ही जाएगा "।

लोग किसका सम्बन्ध किससे बना दे कुछ पता नही । अब आप भी सोच के देखिये "होत न आज्ञा बिनु पैसारे "?

5 टिप्‍पणियां:

  1. अजी जब छॊटे से थे तब पढा करते थे कभी कभी हनुमान चालीसा, पेपरो के दिनो मै, पास होने के लिये, इस लिये हम पापियो को क्या पता, कोई ग्यणी, ओर ध्याणी ही इस का असली अर्थ बता पायेगा... लेकिन इस पैसारे का कोई अन्य मतलब होगा.
    धन्यवाद, लेकिन आप के दोस्त की बात आज के युग के हिसाब से तो ठीक लगती है.

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  2. कम अकल वाले लोग ऐसे ही किसी भी चीज़ की टांग तोड़ कर अर्थ निकलते हैं...और फिर कहेंगे की शास्त्रों में लिखा है.

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  3. प्रिय मित्रो "राम द्वारे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे " पूरा दोहा यह है. इसका अर्थ यह है की बिना आपकी आज्ञा के कोई भी राम जी के दर्शन के लिए उनके लोक में नहीं जा सकता / या कोई भी बिना आपकी कृपा के राम जी के दर्शन नहीं कर सकता..........यह तो अर्थ हुआ और आलोक दूसरों का नाम लेकर हिन्दू देवी देवताओं मजाक न उडाओ.

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  4. श्रीमान बेनामी जी, आपने जो अर्थ बताया है मैं उससे पूर्णतया सहमत हूँ, परन्तु जो मैंने लिखा है वो मेरा मत नहीं है वो एक प्रसंग हुआ है मेरे साथ जिसका जिक्र मैंने अपने लेख में किया. यदि किसी को भी मेरे इस लेख से जाने या अनजाने में कोई भी धार्मिक या मानसिक क्षति पहुचती है तो मुझे उसके लिए खेद है. कृपया इस लेख को अन्यथा न ले.

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