14 मार्च, 2009

होली में पहेली

१०० लोग की पहेली का सही उत्तर

१३ दोस्त + १५ रिश्तेदार + ७२ घरवाले = १०० लोग

सही जवाब दिया सतीश चंद्र सत्यार्थी जी ने , बहुत बहुत बधाईया

होली में गाँव गया तो मेरी 6 वर्ष की भतीजी मेरे पास आई और बोली "चाचा मेरे पहेली का जवाब दे सकते हो"। मैंने कहा पहेली पूछोतो उसने मुझसे तीन पहेली पूछी

- एक हाथी के सामने १२ केले रखे थे, उसने ११ खा लिए पर १२ वां नहीं खाया बताओ क्यों ?
मैंने कहा "केला ख़राब रहा होगा"। वो बोली गलत "१२ वां केला प्लास्टिक का था"

- एक हाथी के सामने १२ केले रखे थे, उसने एक भी नहीं खाया बताओ क्यों ?
मैंने कहा "सारे केले प्लास्टिक के होंगे"। वो बोली गलत "हाथी प्लास्टिक का था "

- एक बार हाथी और चींटी छुपम-छुपाई खेल रहे थे , चींटी जा के मंदिर में छुप जाती है लेकिन हाथी को पता चल जाता है की चींटी मंदिर में है, बताओ कैसे ?
मैंने कहा "हाथी ने चींटी को छुपते हुए देख लिया होगा "। वो बोली गलत "चींटी की चप्पल मंदिर के बाहर थी"।

फिर बोली लगता है आप पढ़े लिखे नहीं है जो मेरे एक भी पहेली का जवाब नहीं दे पाएअगली बार पढ़ के आईयेगा

10 टिप्‍पणियां:

  1. भई हमें तो पता ही नहीं चला कि आपने कब पहेली पूछ ली.......ताऊ वाली पहेली तो जीत नहीं पाए,लेकिन यहां तो मुकदर आजमा ही सकते थे.

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  2. होली में पहेली अच्छी रही ,
    बच्चो से पंगा मत लिया करो .

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  3. आजकल बच्‍चे जरूरत से अधिक होशियार हो गए हैं ... उनकी बातों का जवाब देना मुश्किल होता है।

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  4. पहेली का तो हमें पता ही नहीं था वरना जवाब तो हम भी दे सकते थे .
    आप को तो भी इन पहेलियों के जवाब नहीं मालूम थे .

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  5. सतीश चंद्र सत्यार्थी जी को बधाई,आप की भतीजी के हिसाब से हम भी आप जेसे ही हुये, बहुत प्यार इन नन्ही सी बच्ची को आप का धन्यवाद उस की शरारती बातो को बताने के लिये

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  6. बहुत खूबसूरत रही जी ये पहेली पूछना तो.:)

    रामराम.

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  7. प्रिय आलोक, आप मेरे ब्लौग ज़ेन-कथा पर आये और आपने इतने सारे प्रेरक कमेंट्स दिए, इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ. आपका ब्लौग पठनीय है और मैंने इसे अपनी रेगुलर फीड में डाल लिया है. अच्छा लिखते और पढ़ते रहें. शुभकामनाएं.

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  8. बहुत सही आलोक भाई...अपने बचपन को यूं ही सहेजे रहें, और बांटते रहें। हम आते रहेंगे यहां ।

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  9. चलो भई, कहीं तो जीते.
    ऐसी ही आसान पहेलियाँ पूछते रहा करिए.
    इससे हमें भी भ्रम रहेगा कि हम अक्लमंद हैं. :)
    ताऊ के यहाँ तो कुछ पल्ले पड़ता नहीं.
    ये छोटे-छोटे चुटकुले बचपन में हम भी खूब शेयर किया करते थे.

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