27 मार्च, 2009

वक़्त तेज चलता है

कभी -कभी कुछ मन में ख्याल आता है , उन्हें आज सबको सुनाना चाहता हूँ .

हर बार उठता , सम्भलता और चलता हूँ

फिर भी खुद को सबसे पीछे पाता हूँ !
बहुत बार पूछा है मैंने खुद से ये सवाल
वक़्त तेज चलता है या मैं धीरे रह जाता हूँ !!

हर बार देखता हूँ
हर बार सोचता हूँ !
कुछ कहना चाहता हूँ
पर हर बार खामोश रह जाता हूँ !!

कभी खुद की, कभी दुसरो की सुनता हूँ
सोच कर बहोत एक कदम आगे रखता हूँ !
पर जब देखता हूँ उस जगह को,पता चलता है
दो कदम वक़्त से पीछे रहता हूँ !!

सफ़र करने की चाह थी जिन्दगी में बहोत
जिन्दगी को एक सफ़र की तरह जीये जा रहे है !
कभी सफ़र थका देता है , कभी जिन्दगी थक जाती है
फिर भी मंजिल की तलाश में हम चले जा रहे हैं !!

ऐ दोस्त तेरे याद में हम अपना सबकुछ लुटा बैठे है!
हम अपना आज तो क्या इतिहास मिटा बैठे है !!
और वो सोचते हैं की हम उनको भुला बैठे है !!!

13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब.... सफ़र करने की चाह थी जिन्दगी में बहोत
    जिन्दगी को एक सफ़र की तरह जीये जा रहे है !
    कभी सफ़र थका देता है , कभी जिन्दगी थक जाती है
    फिर भी मंजिल की तलाश में हम चले जा रहे हैं !!

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  2. आलोक जी अगर लाइन कुछ ऐसी हो तो

    ऐ सनम तेरे याद में हम अपना सबकुछ लुटा बैठे है!
    हम अपना आज तो क्या इतिहास मिटा बैठे है !!
    और वो सोचते हैं की हम उनको भुला बैठे है !!!
    कोई कह दे जाके उन्हें , उनकी तस्वीर दिल से लगाके बैठे है .

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  3. दिल की बातो को लिख दिया है आपने , कहीं कोई दर्द सा छुपा है हर ख्यालों में .

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  4. आलोक भाई , कवि बन गये । का बात है बाबू सबकुछ उड़ेले देहा हियां पय । मस्त रही प्रस्तुती भाई जी ।

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  5. आलोक भाई आज इस उदास कवि को कह से पकड लाये, ओर सुंदर कविता सुना दी.
    धन्यवाद

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  6. वक़्त तेज चलता है या मैं धीरे रह जाता हूँ !!

    आलोक जी
    सुन्दर पर उदास मन से लिखी कविता है.......
    वक़्त अक्सर या तो हम से आगे रहता है या पीछे,
    सही लिखा है

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  7. सुन्दर फलसफा, उचित प्रश्न, कविता में अच्छा ढाला है.

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  8. बहुत गहन भावाभि्व्यक्ति है. शुभकामनाएं.

    रा्मराम.

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  9. हर बार देखता हूँ
    हर बार सोचता हूँ !
    कुछ कहना चाहता हूँ
    पर हर बार खामोश रह जाता हूँ !!


    बहुत ही उम्दा ......

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